शिक्षा का तत्व
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि ज्ञान मनुष्य के अन्दर ही है , कोई भी ज्ञान बाहर से नहीं आता ; सब अन्दर ही है| मनुष्य जो कुछ सीखता है वास्तव में वह अविष्कार करना ही है,
स्वामीजी का मत है कि मनुष्य का अपनी अनंत ज्ञान स्वरुप आत्मा के ऊपर से आवरण को हटा लेना ही आविष्कार है | स्वामीजी आगे कहते हैं कि न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण का अविष्कार किया तो क्या वह आविष्कार कहीं एक कोने में न्यूटन की राह देख रहा था क्या? नहीं वह उसके मन में ही था |
जब समय आया तो उसने उसे जान लिया या ढूंढ निकाला |विश्व का असीम भंडार स्वयं तुम्हारे मन में है, बाहरी संसार तो एक सुझाव है एक प्रेरक मात्र है जो तुम्हे अपने ही मन को पढने के लिए प्रेरित कर्ता है |सेव के गिरने से न्यूटन को कुछ सूझा और अपने मन का अध्ययन किया |उसने अपने मन में विचार किया और पुरानी कड़ियों को व्यवस्थित कर एक नयी कड़ी को देखा और जिसे हम गुरुत्वाकर्षण का नियम कहते हैं |
वह न तो सेव में था और न ही पृथ्वी के केंद्र में था वह तो न्यूटन के मन में था |

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